व्रत और विज्ञान (भाग 1)
व्रत और विज्ञान (भाग 1) ॥ श्रीहरिः ॥ व्रत- परिचय पूर्वाङ्ग तत्त्वदर्शी महर्षियोंने हम पर बड़ी कृपा करके हमें व्रत रूपी महान विज्ञान प्रदान किया है। व्रत केवल हिंदू धर्म में ही नहीं अन्य धर्मों में भी अपनाए गए हैं। अतः हमारे मनीषियों ने व्रतों से प्राणिमात्र विशेषकर मनुष्य पर बड़ा भारी उपकार किया है। भारत में हमारे महर्षियों ने बताया कि असाध्य या प्राणान्तक महाव्याधियाँ भी व्रतोंके प्रयोगसे निर्मूल हो जाती हैं और व्रत के द्वारा अपूर्व तथा स्थायी आरोग्यता प्राप्त होती है। हमारे महर्षि ने बताया कि किसी भी प्रकार का आप कार्य जो दूसरों को कष्ट पहुंचाए और छिपकर किया जाए वह पाप होता है और यह पाप कभी-कभी रोग के रूप में हमारे सामने आता है। ऐसे पाप रूपी रोगों को दूर करने के लिए व्रत एक अच्छा साधन बताया गया है। मानसिक, कायिक, वाचिक और संसर्गजनित पाप और महापाप आदि भी व्रतों की सहायता से समाप्त किए जा सकते हैं। व्रतों से पाप द्वारा जनित रोगों व उनके समूल नाशका प्रत्यक्ष प्रमाण यही है कि व्रतारम्भके पहले पापयुक्त प्राणियोंका मुख मलिन रहता है और व्रतकी समाप्ति होते ही वह सूर्योदयके कमलकी तरह खिल...