सर्वपितृ अमावस्या
. सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध पक्ष का अन्तिम दिन जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। इसे पितृविसर्जनी अमावस्या, महालय समापन, महालय विसर्जन और दर्श अमावस्या भी कहते हैं। आश्विन माह में आने के कारण इसे आश्विन अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन तर्पण तथा पिण्डदान केवल पिता के लिए ही नहीं बल्कि समस्त पूर्वजों एवं मृत परिजनों के लिए भी किया जाता है। समस्त कुल, परिवार तथा ऐसे लोगों को भी जल दिया जाता है, जिन्हें जल देने वाला कोई न हो। सर्वपितृ अमावस्या पितरों को विदा करने की अन्तिम तिथि होती है। 15 दिन तक पितृ घर में विराजते हैं और हम उनकी सेवा करते हैं फिर उनकी विदाई का समय आता है। इस अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या, पितृविसर्जनी अमावस्या, महालय समापन और महालय विसर्जन भी कहते हैं। कहते हैं कि जो पितृ नहीं आ पाते हैं या जिन्हें हम नहीं जानते हैं उन भूले-बिसरे पितरों का भी...