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Showing posts from November, 2022

आपने पश्चिमी प्रतिभाओं द्वारा इन पंक्तियों को पढ़ा है?

क्या आपने पश्चिमी प्रतिभाओं द्वारा इन पंक्तियों को पढ़ा है? 1. माइकल नास्त्रेदमस (1503 - 1566) "हिंदू धर्म यूरोप का शासक धर्म बन जाएगा, यूरोप का प्रसिद्ध महानगर हिंदू राजधानी है|" 2. जोहान कीथ (1749 - 1832) "यदि आज नहीं, तो एक दिन हमें हिंदू धर्म स्वीकार करना होगा, क्योंकि यही सच्चा धर्म है|" 3. लियो टॉल्स्टॉय (1828 - 1910) "हिंदू धर्म और हिंदू एक दिन इस दुनिया पर शासन करेंगे क्योंकि यह ज्ञान और ज्ञान का मिश्रण है|" 4. ह्यूस्टन स्मिथ (1919) "हिंदुत्व को अपने आप में जितना भरोसा है उससे ज्यादा भरोसा कहीं नहीं है, अगर हम अपने विचारों और दिलों को हिंदुत्व की ओर मोड़ सकते हैं, तो इससे हमें फायदा होगा|" 5. कोस्टा लोबान (1841 - 1931) "हिंदू केवल शांति और सुलह के बारे में बात करते हैं, मैं ईसाइयों को प्रशंसा करने, बदलने और इसमें विश्वास करने के लिए आमंत्रित करता हूँ|" 6. हर्बर्ट वेल्स (1846 - 1946) "हिंदू धर्म को अच्छी तरह से समझने तक कितनी पीढ़ियों को अत्याचार और हत्याओं का सामना करना पड़ेगा? लेकिन दुनिया एक दिन हिंदुत्व से प्रेरित होगी, ...

वैज्ञानिक कारण

*चप्पल बाहर क्यों*    *उतारते हैं। मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर मंदिर में है..। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है..।      *दीपक के ऊपर हाथ*       *घुमाने का वैज्ञानिक*                     *कारण* आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है..।      *मंदिर में घंटा लगाने*            *का कारण* जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते...

भोजन के संदर्भ आचार

👉 भोजन के संदर्भ आचार  *👉भोजन के पश्चात क्या करना चाहिए आैर क्या वर्जित है ?-६* *🚩भोजन के समय क्या करना चाहिए आैर क्या नही ?-०१* भोजन से संबंधित आचारों का विभाजन प्रमुखतः तीन भागों में किया जा सकता है – भोजनपूर्व आचार, भोजन के समय के आचार एवं भोजनोपरांत आचार । भोजन के समय के सर्व आचार क्रमशः आगे दिए हैं । *♦️१. भोजन के समय के आचार* ▪️अ. दाहिने हाथ से भोजन करें । छोटे बच्चों को भी दाहिने हाथ से भोजन करने का अभ्यास कराएं । ▪️आ. अन्न का ग्रास लेते समय पांचों उंगलियों का प्रयोग करें । यथासंभव कांटेचम्मच से न खाएं । ▪️इ. दाल-चावल एवं उसपर घी, इनसे भोजन आरंभ करें । भोजन के आरंभ में भारी, स्निग्ध, मीठे, शीत एवं गाढे पदार्थ सेवन करें । भोजन के बीच में खट्टे एवं खारे पदार्थ तथा भोजन के अंतमें तीखे एवं कडवे पदार्थ सेवन करें । ▪️ई. भोजन करते समय प्रत्येक ग्रास अनेक बार (३२ बार) चबाएं । ▪️उ. भोजन करते हुए मध्यमें अल्प जल पीएं । जलपात्र को (गिलास को) मुख लगाकर जल पीएं; ऊपर से न पीएं । बाएं हाथ में जलपात्र लेकर दाहिना हाथ उलटा कर जलपात्र के निचले भाग को आधार देकर जल पीएं । उच्छिष्ट (जूठे) हाथ...

विवाह के #गठबंधन में क्यों डालते हैं ये 5 चीजें ?

आपने कभी ध्यान दिया है..?      🌸🌸 ॐनमो नारायणाय 🌸🌸 विवाह के #गठबंधन में क्यों डालते हैं ये 5 चीजें ? गठबंधन करते समय वधू के पल्लू और वर के दुपट्टे या धोती में सिक्का (पैसा), पुष्प, हल्दी, दूर्वा और अक्षत, पांच चीजें बांधी जाती हैं, जिनका अपना-अपना महत्व है- #सिक्का: यह इस बात का प्रतीक है कि धन पर किसी एक का पूर्ण अधिकार नहीं होगा, बल्कि समान अधिकार रहेगा। #पुष्प:- प्रतीक है, प्रसन्नता और शुभकामनाओं का। दोनों सदैव हंसते-खिलखिलाते रहें। एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न हों, एक-दूसरे की प्रशंसा करें। #हल्दी:- आरोग्य और गुरू का प्रतीक है। एक-दूसरे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए प्रयत्नशील रहें। मन में कभी हीनता न आने दें। हल्दी छूने से रंग व सुगंध छूने वाले को चढ़ता है। अतः ज़रूरी निर्णय में आपसी परामर्श करें। #दूर्वा:- प्रतीक है विश्वास का।पति-पत्नी का सम्बंध ही विश्वास पर टिका होता है।ऐसा विश्वास कि कभी प्रेम भावना न मुरझाने देना। दूर्वा का जीवन तत्व कभी नष्ट नहीं होता। सूखी दिखने पर भी यह पानी में डालने पर हरी हो जाती है।  ठीक इसी तरह दोनों के मन में ...

भारतीय रसोई के चूल्हे की राख में ऐसा क्या था कि, वह पुराने जमाने का Hand Sanitizer थी ...?

भारतीय रसोई के चूल्हे की राख में ऐसा क्या था कि, वह पुराने जमाने का Hand Sanitizer थी ...? उस समय Hand Sanitizer नहीं हुआ करते थे, तथा साबुन भी दुर्लभ वस्तुओं की श्रेणी आता था। उस समय हाथ धोने के लिए जो सर्वसुलभ वस्तु थी, वह थी चूल्हे की राख। जो बनती थी लकड़ी तथा गोबर के कण्डों के जलाये जाने से। चूल्हे की राख का रासायनिक संगठन है ही कुछ ऐसा । आइये चूल्हे की राख का वैज्ञानिक विश्लेषण करें। इस राख में वो सभी तत्व पाए जाते हैं, वे पौधों में भी उपलब्ध होते हैं। इसके सभी Major तथा Minor Elements पौधे या तो मिट्टी से ग्रहण करते हैं या फिर वातावरण से। इसमें सबसे अधिक मात्रा में होता है Calcium. इसके अलावा होता है Potassium, Aluminium, Magnesium, Iron, Phosphorus, Manganese, Sodium तथा Nitrogen. कुछ मात्रा में Zinc, Boron, Copper, Lead, Chromium, Nickel, Molybdenum, Arsenic, Cadmium, Mercury तथा Selenium भी होता है । राख में मौजूद Calcium तथा Potassium के कारण इसकी ph क्षमता ९.० से १३.५ तक होती है। इसी ph के कारण जब कोई व्यक्ति हाथ में राख लेकर तथा उस पर थोड़ा पानी डालकर रगड़ता है तो यह बिल्कुल व...