श्रीराम भगवान की आयु कितनी थी?

रामायण श्रीराम की आयु के बारे में कुछ कहा गया है। लेकिन इन के शासनकाल के विषय मे जानकारी दी गयी है जिससे हम इनकी आयु का केवल अंदाजा लगा सकते हैं।

श्रीराम और माता सीता के विषय मे वाल्मीकि रामायण मे कहा गया है कि देवी सीता श्रीराम से 7 वर्ष छोटी थी। श्रीराम विवाह के समय 25 वर्षों के थे तो इस हिसाब से माता सीता की आयु उस समय 18 वर्षों की थी। विवाह के पश्चात 12 वर्षों तक वे दोनों अयोध्या में रहे उसके बाद उन्हें वनवास हुआ। इस हिसाब से वनवास के समय श्रीराम 37 और माता सीता 30 वर्ष की थी। तत्पश्चात 14 वर्षों तक वे वन में रहे और वनवास के अंतिम मास में श्रीराम ने रावण का वध किया। अर्थात 52 वर्ष की आयु में श्रीराम ने 40000 वर्ष के रावण का वध किया। तत्पश्चात श्रीराम ने 11000 वर्षों तक अयोध्या पर राज्य किया। तो उनकी आयु भी हम तकरीबन 11100 वर्ष अर्थात लगभग 30 दिव्य वर्ष के आस पास मान सकते हैं।

श्री राम की प्रमाणिक आयु कितने वर्षों की थी?

बाल्मिकी रामायण और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान श्री राम की आयु 11000 वर्ष की थी |जबकि आधुनिक शोध जारी है|

भगवान श्री राम की एक बडी बहन भी थी जिसका नाम शांता था। शांता बहुत होनहार कन्या थी, हर क्षेत्र में परिपूर्ण थी उसे हर क्षेत्र में अनूठा ज्ञान था। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार देवी शांता को राजा दशरथ ने अंगदेश के राजा रोमपद को गोद दे दिया था। एक बार जब अंगदेश के राजा रोमपद राजा दशरथ से मिलने अयोध्या अपनी पत्नी के साथ आये तो उन्हे ज्ञात हुआ के राजारोमपद की कोई संतान नहीं है। संतान ना होने का क्या दुःख होता है यह समझते हुए राजा दशरथ ने अपनी बेटी शांता को उन्हें दे दिया। उसके बाद राजा रोमपद शांता को लेकर अंगदेश लौट आये।

हिमाचल के कुल्लू में शृंग ऋषि के मंदिर में भगवान राम की बड़ी बहन शांता की पूजा होती है। यह मंदिर कुल्लू से 50 कि.मी दूर बना हुआ है। यहां देवी शांता की प्रतिमा भी स्थापित है, इस मंदिर में देवी शांता और उनके पति शृंग ऋषि की साथ में पूजा होती है। दोनों की पूजा के लिए कई जगहों से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

मंदाकिनी नदी के तट पर बसा चित्रकूट धाम भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है। कहते है यहां भगवान राम १४ वर्ष के बनवास के दौरान माता सीता और अनुज लक्ष्मण के संग ११ वर्ष ११ माह ११ दिन बिताए थे।


मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के पूर्वजों का क्या नाम था ?

भगवान राम ने इक्ष्वाकु वंश में जन्म लिया था. इक्ष्वाकु वैवस्वत मनु के 9 पुत्रों में से एक थे. मनु जब छींक रहे थे तब इक्ष्वाकु पैदा हुए. फिर वंश आगे बढ़ा. पर इक्ष्वाकु वंश के अच्छे दिन आए जब स्वयं भगवान नारायण ने राजा सगर को आशीर्वाद दिया कि तुम्हारे वंश की कीर्ति हमेशा अजर अमर रहेगी. इक्ष्वांकु और भगवान राम के बीच कुल 53 पीढ़ियों का जेनरेशन गैप था. वो भी तब जब इंसान कई सौ वर्षों तक जीते थे.

तो भगवान राम के पूर्वजों का फ्लोचार्ट इस तरह है:

इक्ष्वाकु
|
विकुक्षि (शशाद)
|
ककुत्स्थ
|
अनेना
|
पृथु
|
विष्टराश्च
|
आर्द्र
|
युवनाश्च
|
श्रावस्त
|
बृहदश्व
|
कुवलाश्व (धुंधुमार)
|
दृढ़ाश्व
|
हर्यश्व
|
निकुंभ
|
संहताश्व
|
प्रसेनजित
|
युवनाश्च
|
मांधाता
|
पुरुकुत्स्थ
|
त्रसदस्यु
|
सम्भूत
|
त्रिधन्वा
|
त्रय्यारुण
|
सत्यव्रत
|
हरिश्चंद्र
|
रोहित
|
हरित
|
चंचु
|
विजय
|
रुरुक
|
वृक
|
बाहु
|
सगर
|
पंचजन
|
अंशुमान
|
दिलीप
|
महाराज भगीरथ
|
राजा श्रुत
|
नाभाग
|
अंबरीष
|
सिंधुद्वीप
|
अयुताजित्
|
ऋतुपर्ण
|
आर्तुपर्णि
|
सुदास (सौदास, कल्माषपाद)
|
सर्वकर्मा
|
अनरण्य
|
अनमित्र
|
दुलिदुह
|
दिलीप
|
महाबाहु रघु
|
अज
|
दशरथ
|
भगवान राम
|
कुश
|
अतिथि
|
निषध
|
नभ
|
पुंडरीक
|
क्षेमधन्वा
|
देवानीक
|


अहीनगु
|
सुधन्वा
|
शल
|
उक्य
|
वज्रनाभ
|
नल

(स्रोत: ब्रह्मपुराण, गीताप्रेस)



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